Thursday, 16 January 2020

मित्र की परख कैसे करें?(moral stories in hindi, moral stories for kids)

Ye story  moral stories ki category ki ek aisi story hai jo moral stories in hindi aur moral stories for kids search karne par mili sabse acchi story hai. To aaiye jante hain ki ye moral story kaisi moral deti hai.
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ज़िन्दगी में हम बहुत लोगो से मिलते हैं लेकिन उनमे से कुछ ही हमारे दोस्त बनते  हैं और बहुत कम ही हमारे best friend बनते हैं लेकिन हम अपनी ज़िंदगी मे अपने दोस्तों को क्या सही से चुन पाते हैं क्या हम जिन दोस्तो को बेस्ट फ्रेंड बनाते हैं क्या वो सच मे आपके बेस्ट फ्रेंड बनने लायक होते हैं? तो सवाल ये हैं कि हमे कैसे फ्रेंड बनाने चाहिए? तो आईये इस बात को एक कहानी की मदद से समझते हैं-

बहुत समय पहले की बात है। एक गांव में सूरज नाम का एक लड़का रहता था,उसके बहुत सारे दोस्त थे। वो भी बहुत अच्छे अच्छे दोस्त थे। वो उनके साथ अपना पूरा पूरा दिन बिता देता था। सभी दोस्त खूब मस्ती करते थे, साथ साथ घूमने जाते और साथ साथ पढ़ाई भी करते थे। लेकिन ये सब बातें उसके पिता संजय को नही पसंद थी क्योंकि उसे लगता था कि उसके बेटे कर दोस्त अच्छे नही हैं तो उसने ये बात सूरज से कही लेकिन सूरज ने उस बात को नही मन और कहा कि आप गलत हैं मेरे दोस्त बहुत अच्छे हैं हम पूरा दिन साथ बिताते हैं आपको क्यों बुरे लगते हैं मुझे नही पता। संजय का सिर्फ एक दोस्त था जो उसका बहुत अच्छा दोस्त  था, लेकिन वो रोज़ नही मिलते थे।




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 संजय ने सूरज से कहा कि मैं तुम्हारे दोस्त की परीक्षा लेने चाहता हूं, मैं जानना चाहता हूं कि क्या वो सच मे अच्छे दोस्त हैं या सिर्फ ऐसे ही हैं। सूरज तैयार हो गया उसने कहा ठीक है मैं तैयार हूँ आपका जैसा मन परीक्षा लीजिये मेरे दोस्त ज़रूर पास हो जायेंगे। संजय ने कहा ठीक है तो आज रात 1 बजे हम तुम्हारे सबसे अच्छे दोस्त के घर चलेंगे। सूरज मान गया। रात को सूरज अपने पिता के साथ अपने दोस्त के घर गया और अपने दोस्त को पुकारा।


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 काफी पुकारने के बाद भी उसका दोस्त नही आया। फिर थोड़ी देर बात उन्होंने आवाज़ सुनी की उसका दोस्त अपनी माँ से कह रहा है कि माँ उनसे कह दे कि मैं घर पर नही हूँ। सूरज को बहुत बुरा लगा उसका सिर शर्म से झुक गया। फिर उसके पिता उसको अपने दोस्त के घर ले गए वहां उन्होंने अपने दोस्त को बुलाया। अंदर से आवाज़ आयी आ रहा हूँ मित्र रुके रहना थोड़ी देर बाद संजय का दोस्त एक हाथ मे पैसा और दूसरे में लाठी लिए खड़ा था। संजय ने पूछा कि ये किसलिए मैंने तो सिर्फ तुम्हे बुलाया है। दोस्त ने कहा हाँ लेकिन रात को मेरा दोस्त मेरे घर आया कोई ज़रूरी काम होगा या तो पैसे का या कोई झगड़ा हुआ होगा तो मैं दोनो ले आया। ये सुनकर सूरज को समझ आ गया कि दोस्त आखिर कैसे होने चाहिए।



ज्ञान- दोस्त वो नही जो दिन भर आपके साथ रहे आपके साथ घूमे असली दोस्त वो है जो आपके दुख में आपके साथ रहे। ज़िन्दगी में दोस्त काम बनाये लेकिन जांच परख कर बनाये जो सच मे दोस्त बनने लायक हों।


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To dosto zaroor batayein ki ye kahani kaisi lagi kya ye ek acchi moral story thi kya ye sach me moral stories in hindi, moral stories for kids and moral stories for adults ki category me rakhne layak hai.



Wednesday, 25 December 2019

हौसले की उड़ान

नमस्कार मैं कोई अच्छा लेखक नही हूँ बस आज वही लिखने जा रहा हूँ जो मेरी ज़िंदगी मे हुआ है।
      शाम ढल रही थी सब घर लौट रहे थे सूरज की लालिमा अब बस बादलो पर दिखाई दे रही थी। मैं भी अपनी गायों को लेकर लौट रहा था वो मंद मंद हवा और उसमें कहीं दूर से आती मंदिर के घंटियों की आवाज़ मौसम को और भी खूबसूरत बना रही थी दिल चाहता था कि वक़्त यहीं रुक जाए और मैं इसी पल में खो जाऊं जैसे पानी मे चीनी खो जाती है। लेकिन मेरे चाहने से क्या होगा वक़्त तो नही रुकता न । मैन तेज़ी से कदम बढ़ाए और अपने घर की ओर चल दिया लेकिन मन में  वही ख्याल था जो मैं सोचना नही चाहता था। लेकिन मैं ही आखिर क्यों ऐसा क्यों हूँ क्यों लोग मेरे साथ ही ऐसा करते हैं क्या मेरी ज़िंदगी यही है। सच कहूं तो मुझे मेरे इस हुनर से ही नफरत हो गयी थी क्या ये भी कोई हुनर है की मैं किसी की भी तस्वीर बिल्कुल उसके जैसी ही बना देता हूँ तो इसका यह मतलब तो नही न की हर शाम जब मैं थक हार कर घर पहुँचूं तो पूरा गांव मुझसे तस्वीर बनवाये। इन्ही ख्यालो में खोए हुए मैं कब घर पहुंच गया मुझे पता ही नही चला। "कहाँ देर हो गयी आज जल्दी से खाना खा लो सब तुम्हारा इंतज़ार कर रहें हैं।" माँ ने कहा। " कितनी भोली है मेरी माँ " मैंने सोचा। खाना खाकर मैं बाहर आया और फिर लोग मुझसे अपनी तस्वीर बनवाने लगे। यह बात एक दिन की नही रोज़ की थी और मैं हमेशा सोचता था की एक  दिन उस बड़ी सी बिल्डिंग में मैं भी जाकर काम करूंगा जो पहाड़ी के उस पार है। पर क्या मेरा ये सपना कभी सच होगा? बहुत डर लगता था। गांव में पढ़ाई कर नही सकता था दिन भर भैंस चराता और रात को लोगो के चित्र बनाता बस मेरी ज़िंदगी इतनी ही थी।

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Hindi Kahaniya ( AALSI BETA) [हिंदी कहानियां ( आलसी बेटे)]

      एक दिन मैं जब उस ऊंची पहाड़ी पर बैठा उस ऊंची बिल्डिंग पर तेज़ चमकती लाइट को देख रहा था  तो दिल मे ख्याल आया क्यों न आज मैं घर ही न जाऊं । मैंने निश्चय कर लिया और चल दिया उस बिल्डिंग की तरफ जो कि मेरे घर से 20km दूर था। मैं 3 घंटे चलने के बाद बिल्डिंग के सामने था दोपहर का वक़्त था और धूप भी ज्यादा। मैं अंदर गया और काम की मांग की लेकिन शायद मेरी उम्र कम थी सिर्फ 14 साल और उन्होंने कहा कि 18 साल के होना तब आना। लेकिन 4 साल बाद क्या मेरी माँ रहेगी जिसकी तबियत इतनी खराब है और मेरे पास इलाज के भी पैसे नही हैं। मैंने सोचा लिया कि कोई काम किये बिना घर नही जाऊंगा। लेकिन पूरा दिन खोजने के बाद भी मुझे कहीं भी कोई भी काम न मिला। शाम हो चुकी थी और शायद अब मुझे खाली हाथ घर लौटना था। मुझसे ये ना होगा मुझे कुछ करना ही होगा लेकिन क्या? मुझे तो कोई काम भी नही आता न पढ़ा लिखा हूँ। अचानक मुझे याद आया कि मैं लोगो के चित्र बना लेता हूँ । मैंने लोगो से अपना चित्र बनवाने के लिए कहा और उनसे मुझे कुछ पैसे मिल गए। मैं खुशी खुशी घर चला गया और उस दिन समझ आया कि यदि मेरेमे कोई गुण बहुत अच्छा है तो मैं जितना उस गुण का प्रयोग करूँगा वो गुण उतना अच्छा बनता चला जाएगा।

आज मेरी उम्र 22 साल है और आज उसी बिल्डिंग में मेरी खुद की कंपनी है लोगो के चित्र बनाने की जो कि मैंने सड़क से शुरू की थी।

Friday, 20 December 2019

Hindi Kahaniya ( AALSI BETA) [हिंदी कहानियां ( आलसी बेटे)]

तो आज मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ एक हिंदी कहानी। जो कि बच्चो के लिए हिंदी कहानी है। कहानी का शीर्षक आलसी बेटा है।
               एक अमीर साहूकार था जो अपनी पत्नी और बेटे के साथ एक कस्बे में रहता था और उसका बेटा बहुत ही आलसी था और दूसरी तरफ साहूकार था बहुत ही परिश्रमी था वह सूर्योदय से पहले हर सुबह शिव मंदिर जाता था और उसके बाद वह अपने खेतों का एक चक्कर लगाता था और जहाँ उसका सारा कारोबार फैला हुआ था साहूकार अपने बेटों के साथ बहुत परेशान था उसकी वजह थी उनका आलसी रवैया जब वह उनसे अपने साथ खेत पर या दुकान पर चलनर को कहता तो वो मन कर देते और सो जाते थे। साहूकार बहुत परेशान हो गया और कुछ दिनों के बाद अकेले खेतों में जाने लगा जब वह बहुत बीमार हो गया और उसकी मौत हो गयी। उसके पिता की मृत्यु के तुरंत बाद सुमित ने व्यवसाय संभाला लेकिन पिता के व्यवसाय में कोई दिलचस्पी नहीं ली, जिससे उसे इस व्यवसाय में बड़े पैमाने पर नुकसान हो रहा था, यह देखकर इसकी माँ ने उनसे कहा कि बेटा, हमें व्यापार में बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है, "तो इसमें मुझे क्या करना चाहिए? व्यापार का कोई भी ज्ञान मेरे पास नही है"  जो आपके दादाजी अगले गाँव में रहते हैं उन्हें इस व्यवसाय का बहुत अच्छा ज्ञान है। तुम उनसे जाकर मिलो वह इस समस्या के लिए समाधान देंगे। "ठीक है माँ मैं कल ही जाऊंगा।" अगली सुबह सुमित अपने दादा को मिलने के लिए गया। 
दादा- भगवान का आशीर्वाद बेटा तुम मुझे बताओ कि पिताजी की मृत्यु के बाद तुम कैसे हो? 
सुमित- हम एक बड़ी हानि का सामना कर रहे हैं और व्यवसायी माँ ने मुझे बताया है कि मुझे आपकी विशेषज्ञता के लिए आपके पास आना चाहिए, केवल आप ही इसे समाप्त करने में हमारी मदद कर सकते हैं, 
दादाजी- आपकी माँ बिल्कुल सही हैं। आपकी समस्या का समाधान मेरे पास है। 
सुमित- दादाजी मुझे जल्दी बताइए।
दादाजी-आपको बस एक काम करना है, जैसे आपके पिता को शिव के पास जाना है। हर सुबह सूर्योदय से पहले मंदिर और उसके बाद आपको अपने सभी व्यवसाय को देखना होगा और आपको हर दिन यह सब करना होगा।
सुमित-मैं वही करूंगा जो आपने मुझे अगली सुबह से बताया था।
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    इसलिए सूर्योदय से पहले जागना शुरू कर दिया। मंदिर और उसके बाद वह हर सुबह अपने व्यवसाय को देखने जाता है, फिर किशोरी की दुकान पर जाता है, उसके बाद अपनी दुकान पर जाता है और कुछ दिनों के लिए उसे काम पर आते देख हर दिन मजदूर एक दूसरे के साथ चर्चा कर रहे थे। बॉस अब काम करने के लिए हर दिन आ रहा है हाँ ऐसा लगता है कि हमें अब सभी घोटालों को रोकना है। अरे आप ठीक हैं अन्यथा हम धीरे-धीरे फंस जाएंगे। सभी मजदूरों ने देखा कि सुमित दुकान और खेतों के चक्कर लगा रहा था। और डर से सभी ने घोटालों को बंद कर दिया और व्यवसाय में नुकसान भी कम हुआ और सुमित और उसकी माँ धीरे-धीरे अमीर बन गए। ओह वाह देखो माँ की दादाजी की सलाह के कारण हम फिर से अमीर हो गए आप सही हैं बेटा आपको अपने दादाजी के पास जाना चाहिए उन्हें धन्यवाद कहना चाहिए कि उसकी माँ ने कहा और वह अपने दादा के पास गया, बहुत बहुत धन्यवाद, आपने चमत्कार किया है, क्योंकि हमारे व्यवसाय में फिर से उन्नति हुई है, मेरे बेटे मैंने कुछ भी नहीं किया है, आपने केवल सारी मेहनत की है लेकिन यह सब आपके आलस्य के कारण ही हो रहा था क्योंकि आपके आलसी रवैये के कारण आप अपने व्यवसाय पर ध्यान केंद्रित नहीं कर रहे थे और लेबर उसका फायदा उठा रहे थे और सभी घोटाले कर रहे थे लेकिन अब आप हर दिन काम करने जा रहे हैं, इसलिए उन्होंने सभी को रोक दिया पकड़े जाने के डर से घोटाले और अपने व्यवसाय को फिर से पनप गया है अपने दादा को सुनकर उसे अपनी गलती का एहसास हुआ उसने अपना आलस छोड़ दिया और अपने व्यवसाय पर बहुत मेहनत करना शुरू कर दिया इसलिए दोस्तों कहानी का नैतिक टी उसका आलस्य एक बुरी बात है, इसलिए हमें अपने आलस्य का त्याग कर समय पर अपना काम पूरा करना चाहिए।

Sunday, 29 September 2019

A BAD EXPERIENCE OF DEEPAWALI

Today I remember those days when I was child. Exactly at this place where I lost everything of my life my first love (my mom), my best friend(my father) and also childhood. Even I was only 10 years old and don't know what is death after that moment I knew everything.
                     
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हौसले की उड़ान

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    We were enjoying the festival of light (Deepawali).My mom shouted on me, "Hey Vijay keep distance from crackers." But I was innocent and didn't obey my mom. Suddenly a cracker blast and I burned in my hand but a piece of cracker flew into my house and my house blast.i was in front of my house and I have no more option to see death of my parents. I lost my everything after that I started working hard in coalmine and after long time I got a good job, good salary everything. But I can not get back my parents nor my childhood.

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